
असम विधानसभा चुनाव के मैदान में इस बार राजनीति सिर्फ मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि निजी आरोपों और डिजिटल विवादों तक पहुंच गई है। राज्य के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma और सबसे युवा उम्मीदवार Kunki Chaudhary के बीच तीखी जुबानी जंग ने पूरे राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह मुकाबला अब सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि नैरेटिव और इमेज की लड़ाई बन चुका है।
मां पर आरोप, राजनीति में भूचाल
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कुंकी चौधरी पर निशाना साधते हुए उनकी मां को विवाद के केंद्र में ला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुंकी की मां ने सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट साझा किए, जो सनातन भावनाओं को आहत करते हैं और पाकिस्तान के समर्थन से जुड़े हैं।
इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और विपक्ष ने इसे निजी हमले की राजनीति करार दिया। वहीं सत्ताधारी पक्ष इसे सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा बता रहा है।
डीपफेक का दावा, पुलिस जांच शुरू
इन आरोपों का जवाब देते हुए कुंकी चौधरी ने सीधे पलटवार किया। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि उनकी मां के खिलाफ वायरल हो रही सामग्री पूरी तरह फर्जी है और इसे डीपफेक तकनीक के जरिए तैयार किया गया है।
कुंकी का आरोप है कि यह सब उन्हें बदनाम करने और चुनाव में कमजोर करने की साजिश है। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वायरल वीडियो असली हैं या तकनीकी रूप से छेड़छाड़ किए गए हैं।
कौन हैं कुंकी चौधरी?
27 वर्षीय कुंकी चौधरी असम की सबसे युवा उम्मीदवारों में शामिल हैं। वह Guwahati के मध्य निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं। उन्होंने लंदन के प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और शिक्षा के क्षेत्र में कई सामाजिक पहल चला चुकी हैं।
राजनीति में नई होने के बावजूद, कुंकी खुद को एक मजबूत और बेबाक आवाज के रूप में पेश कर रही हैं, जिसे युवाओं का खासा समर्थन मिल रहा है।

सीएम को व्यंग्यात्मक जवाब
विवाद के बीच कुंकी चौधरी ने एक वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद के चलते उन्हें घर-घर पहचान मिल गई है, जिसके लिए वे “आभारी” हैं।
उन्होंने साफ किया कि उनकी मां पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और वे इस लड़ाई को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर लड़ेंगी। उनका कहना है कि डराने की कोशिशें उन्हें पीछे नहीं हटाएंगी।
चुनावी लड़ाई या इमेज वॉर?
असम का यह चुनाव अब सिर्फ विकास और नीतियों की बहस नहीं रह गया है। डीपफेक, सोशल मीडिया नैरेटिव और निजी आरोप—ये सभी मिलकर इसे एक इमेज वॉर में बदल रहे हैं।
जहां एक ओर भाजपा इसे सांस्कृतिक मुद्दा बना रही है, वहीं विपक्ष इसे व्यक्तिगत हमलों की राजनीति बता रहा है। ऐसे में सवाल यही है—क्या जनता इस शोर के बीच असली मुद्दों को पहचान पाएगी?
फिलहाल सभी की नजरें पुलिस जांच और आने वाले चुनावी नतीजों पर टिकी हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि इस सियासी जंग में कौन बाजी मारता है।
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